गर्व से
कहो हम हैं नारी
सोचो ,
भगवान
की चित्रशाला में ,
यदि
चित्रित न होती नारी ,
तो फीकी
होती ये दुनिया सारी |
माना,
रंग सजाते हैं, जीवन को ,
पर
रंगों में मुस्कान ,
भरती है
नारी |
पहाड़
प्रतीक है पुरुष का ,
सरल हो ,अविरल
बहती है नारी
पोषण कर
दुनिया को
जीवन
देती है नारी |
आज की
नारी !
करती है
काम भारी-भारी
घर का
हो या बाहर का
दफ्तर
का हो ,या विद्यालय का
चलानी
हो बस ,या रेल
या
उड़ाना हो हवाई जहाज
हर काम
तत्परता से ,ईमानदारी से
करती है
नारी ,
तभी तो
धरा सी ,
क्षमाशील,सहनशील
है नारी |
शत्रु
विनाशिनी बन जाती है ,
जब सेना
में भर्ती हो
देश
सेवा करती है नारी |
खेतों
में पुरुषों संग ,
बराबर
पसीना बहा ,
धरा पर
लाती है हरियाली ,
बूझो तो
,ऐसी कौन सी है जगह
जहाँ
नहीं है नारी,
एक भी
स्थान न ढूँढ़ पाओगे ,
जहाँ
पुरुषों से आगे न निकली हो नारी
पुरुष
है अधूरा नारी बिन ,
पर ,
नारी एक व्यक्तित्व है ,
अस्तित्व
है ,काव्य है
जीवन है
अविरल धारा है ,
नदी की
भांति ,चट्टानों को तोड़ ,
स्वयं
रास्ता बनाती,
आगे
बढती जाती है नारी ,
सोचो ,
भगवान
की चित्रशाला में ,
यदि न
होती नारी तो ,
रंगहीन
होती ये दुनिया सारी
गर्व
करो और गर्व से कहो हम हैं नारी
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ReplyDeleteplease read it ,like it and write a comment
ReplyDeleteThanks
Neera
very nice
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