आज की हिन्दी
वर्तमान समय में,हिन्दी ने
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर
अपनी पहचान बनाई है,
पर, अफसोस कि हिन्दी
अपने ही देश में हुई परायी है।
आज की हिन्दी इसी विषय पर
मैंने भी अपनी कलम के घोड़े
दौड़ाए हैं ,किया है प्रयास हिन्दी
भाषा को समर्पित करने का,
कुछ अपने विचार।
दंश झेलती हिन्दी
बूढ़ी सी लगी है लगने
लड़खड़ाती है जबान
हिन्दी बोलने में ,लगाते हैं
फिर पैग दोअंग्रेज़ी शब्दों के
और महसूस करते हैं कि
वाह-वाह ! क्या बोले
बौनी हो रही है हिन्दी
अंग्रेज़ी के सामने।
अरे! अक्ल के दुश्मनों
क्यों पीते हो अंग्रेज़ी के जाम,
ये जाम ही तो कर रहे हैं
रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीने
वालों की नींद हराम ।
अरे! भाई यह तो है,
अपनी भाषा आम,
मत करो इसका काम तमाम।
साइकल की
रफ़्तार
से
बढ़ रही हिन्दी भाषा
कोई सरकार कहती है,
हिन्दी
व्हाई
हिन्दी
नो-नो नौट एटऔल हिन्दी।
बस! अब सोचो कि क्या होगा,
चढ़ाई पर चढ़ गई
हिन्दी की साइकल,
बहुत ज़ोर लग रहा है,
आगे बढाने में ।
खैर दो-चार पैडल मारे
अंगे्रज़ी शब्दों के ,
और आगे बढ़ा दी
साइकल।
देखिए कक्षा का एक विचित्र दृश्य
जब पढ़ाया दोहा रहिमन धागा------
पूछे बच्चे मैम वाहट इज़ धागा
हमने तो बस पकड़ लिया अपना माथा।
आज यह परिस्थिति है हर घर की
कि सूई धागा नदारद है घर से
तो जानें कैसे नौनिहाल कि क्या है धागा।
और तो और प्रेम रूपी धागा
ये बला है कौन सी
हालात ये हैं जनाब!
कि हिन्दी भाषा तो खो गई।
यही है हकीकत,और आज की हिन्दी ,
कि बिना अंग्रेजी की बैसाखी के
दो कदम भी नहीं चलती
एक भी वाक्य पूरा बिनाअंग्रेज़ी के
नहीं होता पता नहीं कमबख्त
कब टपक जाते है शब्द अंग्रेज़ी के।
आइए ! अब आपको ,
रोज़मर्रा की कुछ बातें बताते है
आज की हिन्दी से रूबरू करवाते हैं।
घर में आती कामवाली बाई,
नहीं पूछती कि वेतन क्या दोगी
गौर फरमाइए वेतन शब्द पर
नहीं पूछती कि वेतन क्या दोगी
पूछती है-मैडम ! मन्थली क्या दोगी
टाइम पर सैलरी दोगी या टैन डैज़ के बाद
सुनते ही सासु जी के खड़े हो जाते है कान ।
कहतीं हैं, मरी अंग्रेज़ी का नशा
सब पर चढ़ गया है,
नामुराद प्रेस वाला भी बिगड़ गया है।
कहता है आन्टी जी,पर क्लौथ रेट बढ़ा
दिया है टू रूपीज़ था अब थ्री कर दिया है।
मैंने कहा भैया पिछले माह ही तो बढ़ाया था
वाक्य पूरा भी नहीं हो पाया और
वो पहले ही बोल उठा आंटी क्या करें
यह तो कोल स्कैंडल की ही माया है।
आज की हिन्दी, आज की हिन्दी
हो गई है इतनी सरल और सुलभ
कि हनी सिंह के कैची गाने
बच्चों का बढ़ाते सामान्य ज्ञान
रंग पूछो पानी का उत्तर मिलता
एकदम आसान आज ब्लू है पानी-पानी।
जनाब! एसी हिन्दी ने देश में
नहीं विदेश में भी धाक जमाई है,
पर सच पूछो तो यारो ऐसी हिन्दी पर ,
संस्कृत और संस्कृति भी लजाई है।
चारों तरफ फूहड़,बेढ़ंगी, बेअदबी
हो रही है हिन्दी, तभी तो , जहाँ
चंद्रबिन्दु था रह गई वहाँ बिन्दी।
बोलचाल में भी देखिए कुछ,
अजीबो-गरीब नमूने,मौसी,
चाची,ताई,बुआ सब हो गई हैं एक,
इन्हें आंटी लगे हैं अब बुलाने।
पिताजी को तो पहले ही कर दिया डैड
माँ
को भी बना दिया है मॉम
इस प्रकार होते रहते हैं,नित नए प्रयोग।
अंत में मैं अनुग्रह करना चाहती हूँ
करना चाहती हॅू विनती एक
हिन्दी,हिन्दी है भारत माता के माथे पर
चाँद
की तरह सुशोभित बिन्दी है।
चाँद
में तो दाग है,
पर हमारी हिन्दी में वो आग है
जो कायम रखेगी हमारी संस्कृति सभ्यता।
हिन्दी में वो क्षमता है, जिसने अन्य भाषाओं
को सहर्ष अपनाया है अंग्रेज़ी,उर्दू, अरबी,फ़ारसी
शब्दों को समेटकर अपना परिवार बढ़ाया है ।
धन्यवाद
नीरा भार्गव 'नीर'
No comments:
Post a Comment