कविता -प्रकृति
प्रकृति के सुन्दर
उपहार,
करते हैं
हम सबको प्यार,
सूरज चंदा
प्यारे तारे,
करते हैं
जग को उजियारे
,
पर्वत धरती नदियाँ देखो,
सदियों से यूँ ही
रहती हैं ,
फलों से
लदे वृक्षों को
देखो,
कहते हैं
बस देना सीखो,
बड़े बनो
पर झुकना सीखो,
धरा हमारी
कहती हमसे,
तुम भी
तो कुछ सहना
सीखो,
हर
उपहार में छुपा
है एक ,
प्यारा सा ,मीठा
सा संदेश,
सीख सभी
से लो तुम
,
पर ध्यान रहे इतना
तो तुमको,
इन्हें नहीं पहुँचाना
चोट,
अगर ये
हमसे रूठ गए
तो ,
कर देंगे
ये सबका नाश।
करो प्रकृति
का संरक्षण
हर संभव
हो प्रयास तुम्हारा
हरा-भरा
,प्रदूषण मुक्त हो
विश्व
,यही है लक्ष्य
हमारा।
नीरा भार्गव 'नीर'
very beutiful poem
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