अतीत
मत याद करो बीते पल को , बीता पल होता दुखदायी |
सुखद अतीत को याद किया , मन में पीड़ा भर आयी |
नहीं आज वह पास हमारे, अन्तर्मन में कोहराम मचा ,
बैठे माथे पर हाथ धरे , वक्त तो जैसे वहीं थमा |
रोया मन, सोचा जो सुखद था, क्यों इतनी जल्दी बीत गया |
सुख-दुख, दिन-रात समान ही होते ,बारी-बारी से आते हैं ,
सब दिन नहीं होते एक समान, उठो, जागो हे मनु संतान !
करो कठिन कर्म, ले अतीत से सीख यही ,
जब सुख न रहा, तो दुख भी भला क्यों ठहरेगा |
भूत सुनहरा था यदि, तो उसे आज में बदल डालो ,
अगर जमीं थी कालुष उस पर, तो उसको भी धो डालो |
जो भी है, बस आज अभी है, इस पल को तुम जी डालो |
आज अभी का हर पल प्यारे, कल हो जाएगा अतीत ,
चाहे तो, हो उन्मुक्त, गगन को छू लो, चाहे तो रो कर जी लो ,
यादें सिर्फ बनेगा यह पल, जैसा चाहो, वैसा जी लो ,
मत याद करो अपने अतीत को, बस आज अभी खुलकर जी लो|
बस आज अभी खुलकर जी लो | बस आज अभी..................... |
नीरा भार्गव 'नीर'
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