राम और दीवाली
आओ बच्चों तुम्हें सुनाए
एक कहानी सच्ची,
अगर सुनोगे ध्यान से,
तो तुम्हें लगेगी अच्छी।
अयोध्या के राजा दशरथ
रानिया थीं तीन,
तीनों रानियों में
बहनों सा था प्यार,
चार हुए थे पुत्र उनके ,
राम-लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न
चारों ही थे बड़े होनहार
था उनमें अटूट प्यार।
करते-करते अद्भुत लीला
करते-करते अद्भुत लीला
युवा हुए जब चारों भैया,
देख-देख हरषाते दशरथ
और हरषातीं तीनों मैया|
विश्वामित्र महामुनि करते थे
वन में यज्ञ ,यज्ञों को नष्ट
करते दानव ,दुखी हुए थे सब |
आया विचार, यज्ञों की रक्षा को
आया विचार मुनि के मन में
क्यों न ले आएँ लक्ष्मण-राम |
क्यों न ले आएँ लक्ष्मण-राम |
वे ही अब संवारेगें
हम सबके बिगड़े काम
|
जाकर वन में ऋषि मुनियों को
किया राक्षसों से मुक्त ,
विश्वामित्र महामुनि संग
दोनों भाई जा पंहुचे जनकपुर
जनकपुरी थी अनुपम नगरी
जनकपुरी थी अनुपम नगरी
वहां आयोजन था बड़ा ही भारी
होना था स्वयंवर सीता का
आये थे दिग्गज दुनिया भर से
मिले सिया को केवल रघुवर
मिले सिया को केवल रघुवर
की प्रतिज्ञा विदेह ने विचारकर
“शिव धनुष की जो चढ़ाये
प्रत्यंचा”
जानकी होगी बस उसी की |
सबने किया प्रयास बहुतेरा
हिला न पाए उसे जरा सा ,
उठो राम दी! आज्ञा गुरुवर ने
शीश झुका किया प्रणाम रघुवर ने ,
शीश झुका किया प्रणाम रघुवर ने ,
उठे राम , किया प्रणाम ,
चढ़ी प्रत्यंचा हुई टंकार
टूटा धनुष हुई रघुवर की
चारों ओर जय-जय कार |
सीता संग अयोध्या
आये थे जब रघुवर,
आये थे जब रघुवर,
सुख पाए सब नारी-नर |
बीत रहे थे सुख से दिन
सोचा दशरथ ने अब
राज्य की जिम्मेदारी से
कर लूँ स्वयं को मुक्त
संदेशा भेज ,बुलाये गुरुवर
लिया गया निर्णय तब,
होंगे राजा राम अब
भई अब होंगे राजा राम
भई अब होंगे राजा राम
फैल गई क्षण में खुश-खबरी
सजने लगी अयोध्या नगरी
ढ़ोल नगाड़े लगे खूब बजने
लगे लोग मंगल गीत गाने
पर,यह क्या ?
हाय विधाता यह क्या ?
हाय विधाता यह क्या ?
मंथरा थी कैकयी की दासी,
राम अयोध्या के राजा हों,
यह बात उसे तनिक न सुहायी,
मंथरा ने कैकयी बहकाई
वन में भेजे दिए रघुराई।
संग में लखन और सीता माई।
फिर जो कुछ हुआ वन में,
फिर जो कुछ हुआ वन में,
उसे सुनो सब बड़े ध्यान से
सीताजी को ले गया रावण,
खोज में भटके दोनों भाई
खोज न पाए सीता माई
हनुमान ने आकर ,
सुग्रीव संग मित्रता करवाई ,जामवंत की आज्ञा पाकर
सागर पार गए हनुमान
ढ़ूंढ़ी सीता ,दिया संदेशा राम का
मत होना उदास हे !माता
करो भरोसा रघुवर का |
आएँगे शीघ्र ही अवधपति
देंगे अत्याचार से मुक्ति
सब वानरों संग मिलकर राम ने
सागर पर सेतु बनवाया
खूब हुई फिर मारा-मारी
राम जी की वानर सेना,
राम जी की वानर सेना,
राक्षसों पर पड़ी थी भारी,
वानरों की सहायता से ,
विजयी हुए थे राम,
चौदह वर्ष बिता वन में,
अयोध्या वापस आए राम,
खुशियाँ मना रहे नर-नारी,
सज गई अयोध्या सारी,
खूब बजे थे ढ़ोल-नगाड़े,
झूम रहे थे जन सारे,
गाती महिलाएँ मंगलाचार
करने स्वागत राम का सब थे तैयार |
गाती महिलाएँ मंगलाचार
करने स्वागत राम का सब थे तैयार |
दिन था कार्तिक की अमावस्या का,
तब से हम भारतवासी,
मिटा अंधकार कोने-कोने से
मिटा अंधकार कोने-कोने से
खूब सजाते दीयों की आली,
आओ सब मिलकर सुख से ,
पुनः मनाए वही दीवाली
राजा राम, अयोध्या वाली
हर्ष-उल्लास,प्रेम,एकता वाली।
नीरा भार्गव
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